सबूत नहीं, इंतेजार को जमानत Reviewed by Momizat on . रांची. विस्फोटक रखने के आरोप में जेल में बंद इंतेजार अली को 56 दिन बाद जमानत मिल गई। सीआईडी को उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। गुरुवार को प्रधान न्यायायुक्त अ रांची. विस्फोटक रखने के आरोप में जेल में बंद इंतेजार अली को 56 दिन बाद जमानत मिल गई। सीआईडी को उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। गुरुवार को प्रधान न्यायायुक्त अ Rating: 0
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सबूत नहीं, इंतेजार को जमानत

सबूत नहीं, इंतेजार को जमानत

रांची. विस्फोटक रखने के आरोप में जेल में बंद इंतेजार अली को 56 दिन बाद जमानत मिल गई। सीआईडी को उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। गुरुवार को प्रधान न्यायायुक्त अनंत विजय सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद इंतेजार अली को 10-10 हजार रुपए के दो मुचलके पर जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि एक जमानतदार इंतेजार का रिश्तेदार होना चाहिए। कोर्ट के इस आदेश की काॅपी दोपहर बाद तीन बजे रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में भेजी गई। वहां इंतेजार की ओर से मुचलके भरे गए। देर हो जाने के कारण उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जा सका। अब वे शुक्रवार को जेल से बाहर आएंगे। जीआरपी ने 20 अगस्त को इंतेजार को कीता स्टेशन पर वर्द्धमान-हटिया पैसेंजर ट्रेन से गिरफ्तार किया था।

पुलिसिया जुल्म के शिकार होने वाले इंतेजार पहले व्यक्ति नहीं हैं। इससे पहले पुलिस ने एक जीवित लड़की की हत्या के जुर्म में धुर्वा के तीन युवकों को जेल भेज दिया था। बाद में लड़की खुद सामने आई और कहा, मैं जीवित हूं।

गुरुवार सुबह 11:20 बजे इंतेजार की जमानत याचिका पर बहस शुरू हुई। इंतेजार के वकील विवेक सिंह ने कोर्ट को बताया कि केस डायरी आ गई है। इसलिए जमानत पर सुनवाई की जाए। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल पेशे से डॉक्टर हैं। जबरदस्ती उन्हें फंसाया गया है। अब तक की जांच में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। उन्होंने समाचार पत्र की कतरनें दिखाने की भी कोशिश की। मगर कोर्ट ने कहा कि मेरिट पर बात रखें। वकील ने कहा, मामले की जांच की जिम्मेदारी सीआईडी को दी गई है। सीआईडी ने जेल में जाकर इंतेजार से दो बार पूछताछ की। सीआईडी की टीम झालदा और इंतेजार के पैतृक गांव कौड़ा (भोजपुर) भी गई। लेकिन, न तो पुलिस को इंतेजार का कोई आपराधिक रिकॉर्ड मिला और न ही झालदा से कोई सुराग। ऐसे में बेवजह उन्हें 56 दिनों से जेल में रखा गया है। इसलिए जमानत दी जाए।

सरकार की ओर से प्रभारी लोक अभियोजक संजीव सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि दो केस डायरी सौंपी गई है। पहली जीआरपी के जांच अधिकारी उमाशंकर दुबे की ओर से और दूसरी सीआईडी के जांच अधिकारी अरुण कुमार मिश्रा की ओर से। जीआरपी ने केस डायरी में इंतेजार को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 और 5 के तहत दोषी ठहराया है, जबकि सीआईडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोई साक्ष्य नहीं मिला। उन्होंने सीआईडी की केस डायरी के पैराग्राफ 45, 55, 129, 130, 131 और 174 का उल्लेख किया। पारा 174 में सीआईडी एसपी होमकर अमोल वीनूकांत ने विस्तृत सुपरविजन नोट दिया है। इसमें उन्होंने इंतेजार अली को निर्दोष ठहराया है।

केस डायरी के विभिन्न पैराग्राफ को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि जांच में सीआईडी को साक्ष्य हाथ नहीं लगे हैं। विरोधाभाषी तथ्यों के आने से इंतेजार को जमानत दी जा सकती है।

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