US के बाद भारत की चीन को वॉर्निंग Reviewed by Momizat on . नई दिल्ली. दक्षिण चीन सागर में चीन की तानाशाही को अमेरिका के बाद भारत ने भी चुनौती दी है। भारत ने चेतावनी देते हुए कहा है, "हम भी दक्षिण चीन सागर में अपना जहाज नई दिल्ली. दक्षिण चीन सागर में चीन की तानाशाही को अमेरिका के बाद भारत ने भी चुनौती दी है। भारत ने चेतावनी देते हुए कहा है, "हम भी दक्षिण चीन सागर में अपना जहाज Rating: 0
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US के बाद भारत की चीन को वॉर्निंग

US के बाद भारत की चीन को वॉर्निंग

नई दिल्ली. दक्षिण चीन सागर में चीन की तानाशाही को अमेरिका के बाद भारत ने भी चुनौती दी है। भारत ने चेतावनी देते हुए कहा है, “हम भी दक्षिण चीन सागर में अपना जहाज भेजने या उसके ऊपर उड़ान भरने को आजाद हैं। वह इलाका फ्रीडम ऑफ नेविगेशन के दायरे में आता है। अगर इस इलाके पर विवाद है, तो उसका हल इंटरनेशनल कानून के दायरे में किया जाए।” बता दें कि अमेरिका ने पिछले हफ्ते दक्षिण चीन सागर में अपना जहाज भेजा था। चीन ने इस पर एतराज जताया था। उसने अमेरिकी जहाज का पीछा भी किया था।

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, यह पहली बार है कि जब विवादित दक्षिण चीन सागर के मामले में भारत ने इतना सख्त रुख अख्तियार किया है। बता दें कि भारत का 55 फीसदी समुद्री कारोबार इसी रास्ते से होता है।

भारतीय अफसरों ने बताया कि हाल में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की फिलीपींस के फॉरेन मिनिस्टर अल्बर्ट एफ डे रोसारियो से मीटिंग हुई। भारत ने फिलीपींस ने वादा किया कि वह दक्षिण चीन सागर को पश्चिम फिलीपींस सागर के नाम से बुलाएगा। इसका नाम का इस्तेमाल दोनों लीडर्स ने अपने ज्वाइंट स्टेटमेंट में भी किया था। भारत ने दक्षिण चीन सागर के 90 फीसदी हिस्से पर चीन के दावे को खारिज किया है।

चीन दक्षिण चीन सागर में 12 समुद्री मील इलाके पर हक जताता है। इस इलाके को ’12 नॉटिकल मील टेरिटोरियल लिमिट’ कहते हैं। यह इलाका दक्षिण चीन सागर में बने आर्टिफिशियल आइलैंड के आसपास का ही है। चीन के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश (ताइवान, फिलीपींस, वियतनाम और मलेशिया) भी इस इलाके पर अपना दावा जताते हैं। पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ मीटिंग में शी जिनपिंग ने कहा था कि वे इस इलाके में सेना तैनात नहीं करना चाहते। हालांकि, अमेरिका को लगता है कि चीन यहां मिलिट्री एक्टिविटीज बढ़ा रहा है। इसलिए वह इस इलाके में आवाजाही कर रहा है।

दक्षिण चीन सागर में तेल और गैस के कई विशाल भंडार दबे हुए हैं। अमेरिका के मुताबिक, 213 अरब बैरल तेल यहां मौजूद है। 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है। इस समुद्री रास्ते से हर साल 7 ट्रिलियन डॉलर का बिजनेस किया जाता है। चीन ने 2013 के आखिर में एक बड़ा प्रोजेक्ट चलाकर पानी में डूबे इस रीफ एरिया को आर्टिफिशियल आइलैंड में बदल दिया।

अंतरराष्ट्रीय समुद्र कानून देशों को उनकी समुद्री सीमा से 12 समुद्री मील तक के क्षेत्र में अधिकार देता है। उसके बाहर का जल क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा माना जाता है।
कोई भी देश इस सीमा के बाहर किसी क्षेत्र पर दावा नहीं कर सकता।

बीते हफ्ते अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में चीन के आर्टिफिशियल आइलैंड के पास गाइडेड मिसाइल से लैस जंगी जहाज यूएसएस लासेन भेजा था। चीन ने दावा किया कि उसने अमेरिकी जहाज का पीछा किया और वॉर्निंग दी थी। वहीं, अमेरिका का कहना था कि उसकी जहां मर्जी होगी, वहां जाएगा। यूएस थिंकटैंक एशिया मैरीटाइम ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव ने कहा है कि चीन पहले ही आर्टिफिशियल आइलैंड पर कई बिल्डिंग बना चुका है। यहां उसने कम्युनिकेशन, मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर, हेलिपैड और कंक्रीट प्लान्ट बनाए हैं।

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