पढ़े-लिखे ही कर रहे भ्रष्टाचार Reviewed by Momizat on . रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि समाज और देश में जो विकृतियां हैं, उसकी मूल वजह गलत शिक्षा नीति है। पढ़े-लिखे व्यक्ति ही भ्रष्टाचार कर रहे हैं। इस पर श रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि समाज और देश में जो विकृतियां हैं, उसकी मूल वजह गलत शिक्षा नीति है। पढ़े-लिखे व्यक्ति ही भ्रष्टाचार कर रहे हैं। इस पर श Rating: 0
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पढ़े-लिखे ही कर रहे भ्रष्टाचार

पढ़े-लिखे ही कर रहे भ्रष्टाचार

रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि समाज और देश में जो विकृतियां हैं, उसकी मूल वजह गलत शिक्षा नीति है। पढ़े-लिखे व्यक्ति ही भ्रष्टाचार कर रहे हैं। इस पर शिक्षाविदों को चिंतन करने की जरूरत है। वे शनिवार को राजधानी के लिए होटल में “शिक्षक प्रशिक्षण में नई शिक्षा नीति’ विषय पर आयोजित वर्कशॉप के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। आयोजन उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, रांची यूनिवर्सिटी और एनसीटीई ने संयुक्त रूप से किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद शिक्षा नीति को लेकर कई कमेटियां बनीं, लेकिन चिंता की बात है कि अभी भी स्टूडेंट्स को क्वालिटी एजुकेशन नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षकों की इच्छा होनी चाहिए कि वे पैसे कम और अधिक यश के लिए कार्य करें। विकसित भारत के निर्माण की नींव शिक्षकों के हाथों में है। आज गुरु व शिष्य के बीच व्यापारिक संबंध हो गया है। स्वास्थ्य व स्कूल का बाजारीकरण हो गया है। हर चीज के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं हो सकती है। शिक्षक व आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

एनसीटीई के युगलाल सिंह ने कहा कि 30 वर्षों के बाद नई शिक्षा नीति बनाने के प्रयास शुरू किए गए हैं। इसके लिए देशभर में कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इस मौके पर एनपीयू के वीसी डॉ. एएन ओझा, कोल्हान विवि के वीसी डॉ. आरपीपी सिंह, विनोबा भावे के प्रोवीसी डॉ. एमपी सिन्हा, रजिस्ट्रार डॉ. एके चौधरी, डॉ. अशोक चौधरी, डॉ. आशीष झा, डॉ. अशोक सिंह, डॉ. करमा उरांव, डॉ. प्रीतम कुमार, डॉ. प्रकाश झा, डॉ. अजय कुमार, सुशील कुमार राय, डॉ. जीएस तिवारी, डॉ. मोहनलाल साहू, डॉ. राजीव सिंह समेत अन्य मौजूद थे। संचालन डॉ. कमल बोस और डॉ. विनय भरत ने संयुक्त रूप से किया।

सीएम ने कहा कि स्टूडेंट्स को ऐसी शिक्षा दें, जिससे नैतिकता, आध्यात्मिकता और सामाजिकता की सीख मिले। रटानेवाली शिक्षा पद्धति समाप्त करने की जरूरत है। महापुरुषों की जीवनी पढ़ाने की जरूरत है। शिक्षा ऐसी हो कि दुनिया के तमाम देश बाजार बने और भारत मेक इन इंडिया। डिग्री से अधिक महत्व हाथ के हुनर का हो। कक्षा पांचवीं से ही कौशल की पढ़ाई पर बात हो रही है।

उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के प्रधान सचिव एके सिंह ने कहा कि शिक्षक को हर क्षेत्र का ज्ञान होना चाहिए। उन्हें कंटेंट व प्रजेंटेशन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कंटेंट भी चरित्र निर्माण पर आधारित हो। कहा कि प्रजेंटेशन में बदलाव के बावजूद स्कूल व कॉलेजों की शिक्षा में गुणवत्ता नहीं दिख रही है। शिक्षक की संख्या बढ़ रही रही है, जबकि स्टूडेंट्स घट रहे हैं।

आरयू के वीसी डॉ. रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि कॉलेज में स्किल डेवलपमेंट कोर्स संचालित होने से ही मेक इन इंडिया का सपना सच होगा। स्किल डेवलपमेंट के लिए फाॅर्मल कोर्स मॉड्यूल तैयार करने की जरूरत है। शिक्षक छात्रों का रोल मॉडल बनें। लीडरशिप क्वालिटी डेवलप करेंगे, तभी बच्चों को लीड कर पाएंगे।

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